मुझे कुछ कहना है...

Tuesday, October 04, 2005

बढते कदम

इन बढते हुये कदमो को न रोकना कभी
मुश्किलो को देख कर हिम्मत न छोडना कभी
लोग कहेगे बहुत कुछ सून के न बहकना कभी
रास्ते कठीन हो फिर भी मन्जिल से पहले न रुकना कभी
कठीन कुछ भी नही है, कह के असम्भव पीछे न हटना कभी
आसान हो जायेगी मंजिल कदम पहला तो बढाना कभी
आसमाँ आ जायेगा हाथ मे जी से हाथ को ऊपर उठाना कभी
कारवाँ बन ही जायेगा कदम अपना आगे बढाना कभी

3 Comments:

  • At 6:59 PM, Blogger मिर्ची सेठ said…

    आपकी कविता इतनी अच्छी लगी कि अपने सजाल पर भी चिपका दी। आशा है आप बुरा नहीं मानेंगे।

     
  • At 7:06 PM, Blogger Kalicharan said…

    Is kavita main to ekdum thakuron ka josh samaya hua hai. Sahi likhe rahe.

     
  • At 9:28 AM, Blogger Suraj Deo Singh said…

    नही मिर्ची सेठ, मै बुरा नहीं मानूगा | ये तो मेरी खुशकिश्मती है कि अपने मेरी कविता को अपने सजाल पर चिपका दी है |

     

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